मैंने यह ब्लॉग प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे बच्चों के लिए बनाया है । चूकि यह ब्लॉग को अभी १० दिन भी नही हुए हैं । इसलिए इसको वास्तविक पाठकों को अभी इसके बारे में कम ही पता होगा । इसीलिए एक पोस्ट में एक प्रश्न पोस्ट कर रहा हूँ की जब भी मेरे पाठक चाहेंगे उस प्रश्न पर टिपण्णी के द्वारा हम पुनः चर्चा कर सकेंगे।
सुशील दीक्षित
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रविवार, 11 जनवरी 2009
विद्यार्थी जीवन की एक सच्ची घटना
मैं अपने विद्यार्थी जीवन की एक सच्ची घटना अपने पाठको को बताना चाहता हूँ । यह बात १९८९ की है । क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में अधिकारी पद का वेतनमान राष्टीकृत बैंकों के अधिकारी के वेतनमान के बराबर हो गया था । इसलिए ग्रामीण बैंकों की और प्रतियोगियों का झुकाव बढ़ गया था । मैंने भी जमुना ग्रामीण बैंक आगरा में अधिकारी पद के लिए आवेदन किया और परीक्षा बैंकिंग सेवा भरती बोर्ड लखनऊ के द्वारा आयोजित की गई । उन दिनों बी एस आर बी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में चारो प्रस्न्पत्रों को हल करने के लिए १०५ मिनट का समय मिलता था । मैंने इसी लापरवाही में देखा ही नही की ग्रामीण बैंक की परीक्षा के लिए तो केवल ९५ मिनट का समय था। मैं गणित अच्छी होने के कारण सबसे अंत में इसे करता था कि जो भी समय बचेगा उसी में हल हो जाएगा । मैंने तीन प्रश्न पत्रों को हल कर लिया मेरे हिसाब से २२ मिनट का समय बचा था और गणित का पूरा प्रश्न पत्र हल के लिए बाकी था । मैंने सोचा बहुत समय एक बार टॉयलेट हो आता हूँ (ऐसा भी मैंने पहली बार किया था )। मैं जब लौटकर आया तो प्रस्न्पत्र पर नजर पड़ी तो देखा अरे यह पेपर तो ९५ मिनट का ही है और नजर भी इसलिए पड़ गहि क्योंकि मैंने जाते समय प्रस्न्पत्र को बंद कर दिया था । अब मेरे पास १० मिनट से भी कम बचे थे ।
लेकिन गणित पर अच्छी पकड़ होने के कारण मैं तुंरत प्रश्न पत्र हल करने बैठ गया । इन १० मिनट में मैंने पूरे ५० प्रश्न हल कर दिए । मुझे साक्षात्कार के लिए भी बुलाया गया और मैं अन्तिम रूप से भी चयनित हुआ था । मेरा इंटरव्यू आगरा से प्रकाशित होने वाली पत्रिका "प्रतियोगिता विकास " में भी छापा था ।
यह केवल इसी लिए हुआ कि मैंने गणित के किसी वतुनिष्ठ प्रस्न्पत्र को हल करते समय कभी भी पेन का प्रयोग नही किया था और यही आदत मेरे उस दिन काम आई थी । मैं अपने द्वारा अपने गई उन्ही विधिओं को इस ब्लॉग में समझा रहा हूँ ।
सुशील दीक्षित
लेकिन गणित पर अच्छी पकड़ होने के कारण मैं तुंरत प्रश्न पत्र हल करने बैठ गया । इन १० मिनट में मैंने पूरे ५० प्रश्न हल कर दिए । मुझे साक्षात्कार के लिए भी बुलाया गया और मैं अन्तिम रूप से भी चयनित हुआ था । मेरा इंटरव्यू आगरा से प्रकाशित होने वाली पत्रिका "प्रतियोगिता विकास " में भी छापा था ।
यह केवल इसी लिए हुआ कि मैंने गणित के किसी वतुनिष्ठ प्रस्न्पत्र को हल करते समय कभी भी पेन का प्रयोग नही किया था और यही आदत मेरे उस दिन काम आई थी । मैं अपने द्वारा अपने गई उन्ही विधिओं को इस ब्लॉग में समझा रहा हूँ ।
सुशील दीक्षित
गुरुवार, 8 जनवरी 2009
विद्यार्थियों से ----
जैसा की मेरे पहले पोस्ट से ही विदित होता है कि यह ब्लॉग ६ जनवरी २००९ को ही शुरू किया गया है । इस प्रकार इसको अभी केवल २ दिन हुए इसलिए अभी जयादा विद्यार्थियों तक इसकी पोस्ट नहीं पहुची हैं । फ़िर भी जिन विषयों पर चर्चा हो चुकी है उन विषयों पर यदि कोई प्रश्न पूँछना चाहते है तो टिपण्णी के रूप में या मुझे sushildixit@gmail.com पर मेल करके पूँछ सकते हैं । मैं उन प्रश्नों को सरल रूप में हल करने कि विधि भी बता दूँगा । यह प्रश्न यदि किसी प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्न पत्र से हो तो और अच्छा होगा । आप स्वंय देखेगे कि वास्तविक प्रश्न पत्रों के प्रश्नों को इन विधियों से कितनी आसानी से हल किया जा सकता है .
सुशील दीक्षित
सुशील दीक्षित
मंगलवार, 6 जनवरी 2009
दो शब्द
जैसा की मैंने पहले ही लिख दिया है की यह ब्लॉग उन प्रतियोगियों के लिए अत्यन्त उपयोगी होगा जो स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (कर्मचारी चयन आयोग) की उन परीक्षाओं में बैठ रहे हैं जिसमे ऑब्जेक्टिव प्रश्न पूंछे जाते हैं । इसलिए इस क्लास में बेसिक अंकगणित नही सिखाई जायेगी । यहाँ पर यह माना जायेगा की पाठक को बेसिक अंकगणित पता है । यहाँ पर केवल उन प्रश्नों को बिना कलम का इस्तेमाल किए हुए कम से कम समय (लगभग १५ -२० सेकंड में ) में हल करने का तरीका समझाया जाएगा । आज बुधवार से ही इस पर प्रश्न व तरीके पोस्ट करना मैं शुरू कर दूँगा। आज प्रतिशत से सम्बंधित प्रश्नों को पोस्ट किया जाएगा।
सुशिल दीक्षित
सुशिल दीक्षित